भोपाल।(पंचमहलकेसरीअखबारमूलचंदमधोनिया )मूलस्वतंत्रता आंदोलन के '"अमर शहीद मनीराम अहिरवार जी'" सम्मान से वंचित - - (आज 23 अगस्त पर विशेष) मध्यप्रदेश के चीचली नगर के दलित समाज के स्वतंत्रता आंदोलन में 1942 के क्रांतिकारी योद्धा वीर मनीराम जी अहिरवार को आज तक सम्मान क्यों नहीं ?
August 23, 2020 • M.S.Bishotiya

भोपाल।()अंग्रेजों भारत छोडो आन्दोलन देश भर में सन 1942 में संपूर्ण देश में चल रहा था। मध्यप्रदेश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी बड चडकर हिस्सा ले रहे थे। अनेक लोग अपने घर छोड़ कर अंग्रेज़ी हुकूमत के विरोध में मैदान में लडने हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर करने गांधी जी के नेतृत्व में समर्पित हो गये थे। 23 अगस्त 1942 का वह दिन मध्यप्रदेश के जिला नरसिंहपुर के नगर चीचली का है जहाँ आज "शहीद मेला" प्रतिवर्ष लगता है और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। चीचली में 22अगस्त को अंग्रेजी फौज के सेनिको आये उनकी नज़र यहां पर थी कि कोई अंग्रेजी हुकरानो के खिलाफ वगावत न करें। यहां के नौजवान उन दिनों मातृभूमि की सेवा में कार्यरत थे। नगर में एक संकीर्तन कार्यक्रम समापन के बाद जुलूस निकाला जाना था। जिसकी अंग्रेजी मजिस्ट्रेट को खबर मिलने पर उसने सेनिको को भेज दिया। तत्कालीन वातावरण के कारण यह जुलूस राजनैतिक स्वरूप में बदल गया। इस परिस्थिति में अंग्रेजी सेना के मजिस्ट्रेट पूनम अगृवाल ने चीचली में आया और मनीराम अहिरवार जी से गुलामी कराना चाहता। वहीं संकीर्तन का जुलूस तेईस अगस्त को निकला जिसमें भाग लेने वाले लोगों को पकडे जाना लगा। यह शांति धार्मिक जुलूस सभा के रूप में परिवर्तित हो गया अंगेज से कहासुनी होने लगी। इनके द्रारा गोली चलाने की धमकी दी जाने लगी तो मनीराम अहिरवार जी ने जो कि अचूक निशाने बाज थे जिन्होंने पत्थर जब सेनिक के सिर मार हालत उग्र रूप धारण कर लिया। तब अंग्रेजी इंस्पेक्टर ने मजिस्ट्रेट के आदेश पर युद्ध करने लगे दोनों पक्षों में पथराव हुआ मनीराम जी ने उनके सिर को लहूलुहान कर दिया। जुलूस में शामिल मंगल दादा के भी पत्थर लगा और बेहोश हो गए। इनकी घायल अवस्था पर मनीराम ने पथराव तेज कर दिया। बाद में जुलूस के लोगों पर गोली से मार डालने के सक्त आदेश जारी कर दिए इस फरमान सुन मनीराम जी ने सीना तान उन्हें ललकारे वहां कार्यक्रम में शामिल वीर मंशाराम जसाठी को गोली मारी वह तत्काल वहीं शहीद हो गये। इनकी शहादत पर मनीराम अहिरवार ने मोर्चा संभाला और बिट्रिश सेना को गाली देते हुए - - पुनः गोली चलाने कहा साले गोरो हमारा गांव छोडो हमारा देश छोडो। यह सुनकर उन्होंने मनीराम पर अनेक फायर किये, मनीराम जी आजू-बाजू और गोलीबारी से बच गये। लेकिन इन्हीं गोलीयो में से अपने घर के बाहर खडी गौराबाई किया को लगी तथा वह घटना पर शहीद हो गई। मंशाराम जसाठी और गौराबाई कतिया की शहादत के बाद गिरफ्तारी का दौर शुरू हुआ अनेक लोगों को जेल भेजा गया मनीराम अहिरवार को खोजा गया और अंग्रेजों ने तय किया ये नौजवान अखाड़ा का पहलवान है। इसे जेल न भेजकर इससे गुलामी के तौर पर बोझा ढुलाई व सारे काम कराने के लिए पकड़ा जाये। मनीराम दिमाग के तेज थे। उन्होंने अंगृजो को खूब छकाया, तथा अंतिम सांसो तक मुकाबला करते रहे। किसी ने उनका साथ नहीं दिया, अखिर अंग्रेजी सेना ने जाल फैला कर जिंदा पकड़ कर गुलामी कराने के लिए विवश करने लगे। वे झुकने वाले थे तो बर्बरता पूर्वक जुल्म करने लगे उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर अंग्रेज़ो ने मोत के घाट उतार दिया दिया। वीर शहीद मनीराम जी अहिरवार अपने और अपने अनुसूचित जाति वर्ग के स्वाभिमान को बरकरार रखने के लिए वतन पर कुर्बानी दे दी। चीचली नगर में हर साल शहीद मेला आयोजित होता आ रहा है। जो घटना पर शहीद हुए को श्रद्धांजलि अर्पित करने पक्ष - विपक्ष के राष्ट्रीय व स्थानीय नेता और प्रतिनिधि जाकर श्रद्धांजलि कार्यक्रम में जाकर लछेदार भाषण देने आ रहे है। लेकिन वीर शहीद मनीराम जी अहिरवार की भाषणों में बखान करना स्थानीय इतिहास के पन्नों में केवल लिखा जाने तक सीमित है। न उन्हें सरकार द्रारा शहीद का दर्जा देकर सम्मानित किया गया। तथा न ही उनके वारिश जो आज जीवित बचे न उन्हें सरकार से शहीद परिवार के लिए मिलने वाले लाभ दिये गये है। आज शहीद दिवस के अवसर पर अश्रुपूरित विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित। मध्यप्रदेश सरकार से अनुरोध है कि उन्हें शीघ्र शहीद सूची में शामिल कराकर उनकी यादगार में स्मारक बनाया जाये। इनके परिवार को सम्मानित किया जाये। अमर बलिदानी श्री मनीराम अहिरवार जी के चरणों में शत शत नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित है।